कुल्लू

तेलंगाना सरकार की तर्ज पर हिमाचल सरकार भी दे एनपीएस कर्मचारियों को लाभ: देविंद्र सिंह प्रेमी

स्वतंत्र हिमाचल (रामपुर)

अमन भारती हाल ही में तेलंगाना सरकार ने एनपीएस कर्मचारियों को पारिवारिक पेंशन का लाभ दिया है और अपने कर्मचारियों की सेवानिवृत आयु भी बढ़ाई है।और वेतन में भी 30 प्रतिशत वृद्धि की घोषणा की है जो कि तेलंगाना सरकार का कर्मचारी हित में सराहनीय फैसला है जिसका एनपीएस संघ हिमाचल प्रदेश भी स्वागत करता है।

हिमाचल के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों, जिन्हें 15 मई,2003 के बाद भर्ती किया गया है ,जिन्हें उस समय की केंद्रीय सरकार द्वारा जारी एक अधिसूचना के तहत उक्त कर्मचारियों को उनको उनकी पुरानी पेंशन से मेहरूम करवा दिया गया और इसकी जगह पर एनपीएस रूपी एक जिन खड़ा कर दिया। इसी अधिसूचना को आधार बना कर कई राज्य की सरकारों ने भी आनन फानन में अपने अपने कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बंद करके इन तमाम कर्मचारियों को न्यू पेंशन स्कीम के तहत लाकर खड़ा कर दिया। जिस कारण हजारों कर्मचारियों को तो उनकी सेवा निवृति के बाद मात्र 500 से 800 रूपये पेंशन मिल रही है।

ये कर्मचारियों के साथ सरा सर बेइंसाफी है जिस सरकार को अपने कर्मचारियों की ही परवाह नहीं है जिन्हें सरकार की रीढ़ की हड्डी माना जाता है। जिनके साथ इस तरह का सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।दूसरी तरफ एक विधायक और सांसद शपथ लेते ही भारी भरकम पेंशन का हकदार हो जाता है, क्या कर्मचारियों की रगों में भी वही हिंदुस्तानी खून नहीं है जो विधायकों ओर सांसदों कि रगों में है ? इस तरह की असमानता के लिए यहां कोई जगह नहीं होनी चाहिए। भारत जैसे स्वस्थ लोकतंत्र में जहां पर मौलिक अधिकारों का भी प्रावधान है, वहीं पर दो तरह का अर्थात ओपीएस की जगह एनपीएस रूपी पैमाना क्यों लागू किया गया ? कोई दोहरी नागरिकता का प्रावधान थोड़ा भी है ? क्या इसी कारण से 2003 के बाद लगे इन कर्मचारियों के उपर ये काला कानून तो नहीं थोपा जा रहा है कहीं ?वहीं पर जब कि एक कर्मचारी अपने जीवन की जवानी के खूबसूरत लम्हें सरकारी सेवा में रहते हुए सरकार की सेवा करते है ओर जब इनके बुढापे का समय आता है तो इनको सिर्फ पेंशन के नाम पर झुनझुना थमाया जाता है। ये कहां का न्याय है? यह समझ से परे का मामला है।फिर इन सरकारी कर्मचारियों ओर प्राइवेट लालों के सेल्समैन में क्या फर्क है। क्योंकि ईपीएफ तो सेल्समैन का भी कटता ही है। तो फिर क्या फायदा हुआ इन सरकारी कर्मचारियों का जिनको पढने पढाने में उनके मां बाप द्वारा उनकी पढ़ाई पर लाखो रुपए खर्च करके, फिर उसके बाद उन्होंने और मेहनत करके कमीशन उत्तीर्ण करके मेैरिट के अनुसार सरकारी नौकरी हासिल की है। तदोपरांत कर्मचारी सेवारत रहते हुए सरकार द्वारा उनसे 58 साल तक सेवा करवा कर बेरंग घर भिजवाया जाता है। इसी सिलसिले में 2009 वाली अधिसूचना केंद्रीय सरकार ने काफी पहले जारी कर दी हुई है। लेकिन यहां हिमाचल सरकार ने उक्त अधिसूचना को अभी तक भी जारी नहीं किया।
एनपीएस कर्मचारी अधिकारी महासंघ के जिला शिमला के पूर्व अध्यक्ष देविंद्र सिंह प्रेमी ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश सरकार अपने एनपीएस कर्मचारियों को तुरंत एनपीएस के बदले पुरानी पेंशन के दायरे में लाने की अधिसूचना जारी करे। ताकि कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित हो सके।

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