ऊना

चिंतपूर्णी में नवरात्र मेलों के दौरान हवन, पूजन पर प्रतिबंध, प्रसाद चढ़ाने पर भी रोक

दर्शन के लिए पर्ची अनिवार्य, मंदिर में पुजारी नहीं बांधेंगे मौली

बुखार, खांसी अथवा जुखाम जैसे लक्षणों वाले श्रद्धालुओं को आइसोलेट कर भेजा जाएगा अस्पताल

(ऊना)ललित ठाकुर

आगामी 13 अप्रैल से 21 अप्रैल तक चलने वाले नवरात्रों के दौरान माता चिंतपूर्णी मंदिर सुबह 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक खुला रहेगा और श्रद्धालुओं को केवल दर्शनों की अनुमति रहेगी, जिसके लिए दर्शन पर्ची का होना अनिवार्य है जबकि हवन, यज्ञ, कन्या पूजन, कीर्तन, सत्संग, भागवत, मुंडन संस्कार सहित ढोल-नगाड़ों के प्रयोग और भीड़ के एकत्रित होने पर प्रतिबंध होगा। चैत्र नवरात्रों के दौरान कोविड संक्रमण की रोकथाम के लिए एसओपी जारी करते हुए उपायुक्त ऊना राघव शर्मा ने बताया कि मंदिर क्षेत्र में चिन्हित स्थानों पर श्रद्धालुओं की कोविड-19 लक्षणों के लिए स्क्रीनिंग की जाएगी। सड़कों के किनारे और धर्मशालाओं के अंदर व बाहर किसी भी प्रकार के सामुदयिक रसोई या लंगर की अनुमति नहीं होगी। मंदिर क्षेत्र में अस्थाई दुकानों व अस्थाई पार्किंग भी प्रतिबंधित रहेगी ताकि श्रद्धालुओं की भीड़ एकत्रित न हो।

श्रद्धालुओं के लिए एसओपी

डीसी राघव शर्मा ने बताया कि मंदिर में मैडिकल स्क्रीनिंग के उपरांत केवल बिना लक्षणों वाले श्रद्धालुओं को ही दर्शनों के लिए जाने दिया जाएगा। बुखार, खांसी अथवा जुखाम जैसे लक्षणों वाले श्रद्धालुओं को आइसोलेट करके अस्पताल भेजा जाएगा तथा उन्हें कोविड-19 की नेगेटिव रिपोर्ट आने के पश्चात छुट्टी दी जाएगी। दर्शनों के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को पंजीकरण व मैडिकल स्क्रीनिंग के लिए चिंतपूर्णी सदन, नए बस अड्डा के समीप एडीबी भवन अथवा अन्य चिन्हित स्थल पर संपर्क करना होगा।
उन्होंने श्रद्धालुओं का आहवान किया है कि कोविड-19 सुरक्षा नियमों जैसे मास्क पहनना, निधारित सामाजिक दूरी, हाथों को धोना सहित अन्य सुरक्षा उपायों की सख्ती से अनुपालना सुनिश्चित करें और दर्शनों के लिए जाते वक्त पंक्ति में हर समय दो गज की दूरी बनाए रखें। मंदिर परिसर में प्रवेश से पूर्व हाथों व पैरों को साबुन व पानी से अवश्य धोएं। इसके लिए जगदम्बा ढाबा, मंगत राम की दुकान तथा पुराना बस अड्डा पर व्यवस्था होगी। उन्होंने बताया कि मंदिर में मूर्तियों, प्रतिमाओं व पवित्र पुस्तकों को छूने की मनाही होगी तथा नारियल का प्रसाद चढ़ाने पर भी प्रतिबंध रहेगा जबकि चुनरी व झंडे केवल चिन्हित स्थलों पर चढ़ाए जा सकते हैं। उन्होंने 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों सहित गंभीर बीमारियों से पीड़ित व गर्भवती महिलाओं को मंदिर में न आने की सलाह दी है।

पुजारियों के लिए एसओपी

डीसी राघव शर्मा ने कहा कि पुजारी श्रद्धालुओं को न तो प्रसाद वितरित करेंगे और न ही मौली बांधेंगे। पुजारियों को भी कोरोना संक्रमण रोकथाम के लिए निर्धारित हिदायतों की अनुपालना सुनिश्चित करनी होगी। गर्भगृह में एक समय पर केवल दो बारीदारों को ही बैठने की अनुमति रहेगी।

चिंतपूर्णी सदन के लिए एसओपी

डीसी ने बताया कि चिंतपूर्णी सदन में श्रद्धालु पंजीकरण के लिए संपर्क करेंगे, इसके लिए पंजीकरण और चिकित्सीय परीक्षण हेतु समुचित काउंटरों की व्यवस्था होगी। वहां ड्यूटी पर तैनात स्टाफ हेतु उचित मात्रा में सुरक्षा सामग्री की व्यवस्था रहेगी, साथ ही निर्धारित मापदंडों की अनुपालना भी सुनिश्चित करनी होगी। बीएमओ के साथ परामर्श करके आइसोलेशन कक्ष बनाया जाएगा। निर्धारित सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए फर्श पर निशान बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि होटल संचालकों को भी सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करनी होगी। होटल के प्रवेश द्वार पर हाथों को सेनिटाईज करने की व्यवस्था की व्यवस्था करनी होगी

दुकानदारों व होटल संचालकों के लिए दिशा-निर्देश

डीसी ने कहा कि दुकानदार व होटल मालिकों को सुनिश्चित करना होगा कि उनके स्टाफ और आगंतुकों द्वारा फेस कवर का प्रयोग, हाथों को धोना व सामाजिक दूरी जैसी हिदायतों की अनुपालना हो रही है। कोई भी दुकानदार दुकान से बाहर विक्रय सामग्री प्रदर्शित नहीं करेगा। उल्लंघन करने वाले की दुकान तीन दिन के लिए बंद कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि होटल संचालकों को भी सरकार द्वारा जारी निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करनी होगी। होटल के प्रवेश द्वार पर हाथों को सेनिटाईज करने की व्यवस्था करनी होगी। लक्षणों वाले आगंतुकों को रूकने की अनुमति न दी जाए।

तैनात कर्मचारियों के लिए एसओपी

डीसी ने बताया कि मंदिर क्षेत्र में तैनात पुलिस, होमगार्ड व अन्य कर्मचारियों को हर समय मास्क पहनना होगा तथा वे सुनिश्चित करेंगे कि श्रद्धालु भी हिदायतों की पालना कर रहे हैं। यदि किसी श्रद्धालु ने मास्क नहीं पहना है तो उसका चालान किया जाएगा।

सफाई व्यवस्था में लगे स्टाफ के लिए निर्देश

डीसी ने कहा कि सफाई कर्मचारी निर्धारित वर्दी पहनेंगे। सेवा प्रदाता समय-समय पर स्वच्छता सुनिश्चित करेगा और दिन में तीन बार क्षेत्र की सफाई करवाएगा। एकत्र किए गए कचरे का शीघ्र निपटारा करना होगा। कर्मचारी व्यक्तिगत स्वच्छता और सुरक्षा का ध्यान रखेंगे। हाथ-पैर धोने के क्षेत्रों, रेलिंग, दरवाजों की नॉब वगैरह की निर्धारित समय पर प्रभावी ढंग से कीटाणुनाशक के माध्यम से सैनिटाइजेशन सुनिश्चित करना होगा।
डीसी राघव शर्मा ने कहा कि श्रद्धालु शंभू बैरियर की ओर से गेट नंबर 1 व 2 और मुख्य बाजार से आते हुए चिंतपूर्णी सदन से प्रवेश करेंगे। तीर्थयात्री नए बस स्टैंड और चिंतपूर्णी सदन के समीप पार्किंग स्थानों का उपयोग कर सकते हैं।

लिफ्ट के प्रयोग से संबंधित दिशा-निर्देश

डीसी ने कहा कि लिफ्ट का प्रयोग वर्जित रहेगा, क्योंकि इससे निर्धारित सामाजिक दूरी बनाए रखना मुश्किल है। दिव्यांगों के लिए लिफ्ट का परिचालन किया जा सकता है किंतु प्रयोग के समय केवल एक व्यक्ति को ही अनुमति दी जाएगी। लिफ्ट के अंदर किसी भी कर्मचारी को बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी और लिफ्ट को प्रत्येक प्रयोग के बाद सेनिटाइज किया जाएगा।

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