शिमला

एनपीएस कर्मचारीयों की भी सुने प्रदेश सरकार : देविंद्र सिंह प्रेमी

 

स्वतंत्र हिमाचल (रामपुर) अमन भारती

हिमाचल प्रदेश में लगभग एक लाख कर्मचारी एनपीएस के तहत आते है और ये संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। परन्तु क्या हम सब इस स्कीम से परिचित है नहीं, अभी भी कई कर्मचारी इससे अनभिज्ञ है । 2003 के बाद सामान्य भविष्य निधि स्कीम को बन्द करके एनपीएस स्कीम चलाई गई थी। जीपीएफ को बंद करके एनपीएस को कर्मचारियों पर 2003 के बाद गुपचुप तरीके से लागू कर दिया गया । एन पी एस एक नेशनल पेंशन स्कीम है जिसके तहत हिमाचल में तीन केंद्रीय कंपनियो को हायर किया गया है

एलआईसी ,यूटीआई और एसबीआई, जो भी पैसा विभाग द्वारा महीने में काटा जाता है । उस पैसे को यह एनएसडीएल अपने तरीके से शेयर मार्किट में लगाती हैं।
यहां तक तो सब ठीक है परन्तु क्या रिटायर मेंट के बाद कर्मचारी को पूरे लाभ मिल रहे है। साथियो नहीं मिल रहे हैँ। जैसे-2 कर्मी इस स्कीम के तहत रिटायर हो रहे हैँ तो इस स्कीम की खामियां भी सामने आ रही हैँ। दोस्तों हिमाचल में रिटायर मेंट की उम्र 58 है जब आप रिटायर होंगे तो आपको खाली हाथ घर आना पड़ेगा और कई सालों तक इंतजार करना पड़ेगा। तो जरा सोचिए बिना पेंशन के आपके हाल कैसे होंगे।
दूसरी खामी यह है कि जब आपका पैसा दो साल बाद मिलेगा तो उसका 60 फीसदी ही आपको मिलेगा और बाकि 40 फीसदी कंपनी अपने पास रख लेगी। और जीवनयापन के लिये नाममात्र पेंशन देगी।

उदाहरण के लिए माना 60 साल के बाद कर्मचारी के 20 लाख बने तो कंपनी 60 प्रतिशत के हिसाब से 12 लाख देगी और जो 40 प्रतिशत  पैसा बचा उस पर आपको 4100 से 4500 तक हर माह पेन्शन मिलेगी। और आपके 8लाख रुपए के कंपनी करोड़ो रु कमाएगी।  इतना ही नहीं 60 प्रतिशत पैसे को निकालने का तरीका इतना मुश्किल है कि कुछ कर्मचारियों की मौत हो चुकी है परंतु इनके परिवार जनो को एक पाइ भी नहीं मिली है । और यह बाते जो बताई गई है इसके प्रूफ है। चम्बा के निवासी बालक राम जो कि हाई स्कूल ठन्डोल से दिसम्वर 2012 में रिटायर हुए थे अब उनकी मौत हो चुकी है परंतु इनके परिवार को एक पैसा भी नहीं मिला है।

इसके अतिरिक्त वतरा महविद्यालय पालमपुर से हिंदी के प्रोफ़ेसर श्री जगरूप कटोच जी को सिर्फ 5100 रुपए ही पेंसन मिल पा रही है। अत:यह निति पूरी तरह से कर्मचारी विरोधी है। इस निति के तहत कर्मचारियों को ठगा जा रहा है और बुढ़ापे में दर दर की ठोकरें खाने के लिए मजवूर किया जा रहा है।

अब इसके खिलाफ आवाज़ उठाने का वक्त है परंतु इसके लिए सबको एकजुट होने की जरूरत है शिमला जिला के एनपीएस कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष देविंद्र सिंह प्रेमी सरकार से पुरजोर मांग करते है कि कर्मचारी हित और उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रदेश सरकार तुरन्त प्रभाव से एनपीएस को बंद करके पुरानी पेंशन योजना बहाल करे।

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